Yohimbine Supplement for Fat Loss and Erectile Dysfunction in Hindi

इस लेख में योहिंबाइन (Yohimbine) सप्लीमेंट के विषय में चर्चा करेंगे। योहिंबाइन क्या है, यह वजन कम करने में किस प्रकार सहायक है, यह इरेक्टाइल डिस्फंक्शन पर कैसे काम करता है, इसके दुष्प्रभाव क्या है, यह किसको प्रयोग नहीं करना चाहिए, साथ ही कुछ आवश्यक जानकारी जो आपको सप्लीमेंट प्रयोग करने से पहले पता होनी चाहिए आदि विषयों पर चर्चा करेंगे। योहिंबाइन को एक विषैला सप्लीमेंट माना जाता है जिसके कई दुष्प्रभाव भी देखे गए हैं। बहुत सारे देशों में यह सप्लीमेंट प्रतिबंधित भी किया जा चुका है। इसलिए आपसे अनुरोध है कि कृपया इस लेख को ध्यानपूर्वक पढ़ें।

विषय सूची

  1. योहिंबाइन क्या होता है?
  2. योहिंबाइन का वजन पर क्या प्रभाव है?
  3. योहिंबाइन का इरेक्टाइल डिस्फंक्शन या नपुंसकता पर क्या प्रभाव है?
  4. योहिंबाइन के सेवन से क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं?
  5. योहिंबाइन का प्रयोग किस को नहीं करना चाहिए?
  6. योहिंबाइन के विषय में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी
  7. निष्कर्ष
  8. References

योहिंबाइन क्या होता है?

योहिंबे (Yohimbe) नाम का एक सदाबहार वृक्ष होता है जो मुख्यतः केंद्रीय और पश्चिमी अफ्रीका में पाया जाता है। इस पेड़ की छाल में एक कंपाउंड होता है जिसको योहिंबाइन कहा जाता है। इस पेड़ की छाल को पुराने समय से एक कामोत्तेजक (Aphrodisiac) के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। कामोत्तेजक का अर्थ है संभोग करने की इच्छा और संभोग करने की क्षमता को बढ़ाने वाला। (27)

यह तो इसके छाल का प्रयोग है। वैज्ञानिकों ने इस छाल के अंदर से इस कंपाउंड योहिंबाइन को अलग निकाल लिया है और व्यापारिक कंपनियों ने इस कंपाउंड योहिंबाइन के अलग-अलग सप्लीमेंट बनाकर बाजार में बेचना शुरू कर दिया है। इस सप्लीमेंट को यह कहकर बेचा जाता है कि यह काम उत्तेजना को बढ़ाता है, इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या को दूर करता है, वजन कम करने मैं सहायक है, और खेलकूद में शारीरिक शक्ति और क्षमता को बढ़ाता है। इस लेख में हम इन सभी विषयों पर एक-एक करके चर्चा करेंगे।

योहिंबाइन का वजन पर क्या प्रभाव है?

ऑफिस ऑफ डाइटरी सप्लीमेंट्स ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर यह साफ-साफ लिखा है कि यह सप्लीमेंट वजन कम करने के लिए असरदार नहीं है। (30) ऑफिस ऑफ डाइटरी सप्लीमेंट अमेरिकी सरकार का एक विभाग है जो अत्यंत विश्वसनीय है और स्वास्थ्य संबंधी मुख्य जानकारी प्रदान करता है। लेकिन फिर भी हम योहिंबाइन के विषय में जो वैज्ञानिक परीक्षण किए गए हैं उनका अध्ययन करेंगे।

Study 1 (1)

वर्ष 2006 में 20 पुरुष फुटबॉल के खिलाड़ियों जिनकी आयु औसत 24 वर्ष थी, पर एक परीक्षण किया गया। उन्हें 21 दिन तक प्रतिदिन 20 मिलीग्राम योहिंबाइन दिया गया। उनके दैनिक भोजन को निर्धारित कर दिया गया और साथ ही उनकी दिनचर्या में वेट ट्रेनिंग को भी जोड़ा गया।

21 दिन के पश्चात देखा गया कि उनके शारीरिक वजन, मांसपेशियों के आकार और क्षमता में कोई भी बदलाव नहीं हुआ है। लेकिन शरीर की चर्बी या फैट पहले से काफी कम हो गई है। शरीर की फैट 9.3% से 7.1% पर आ गई है।

Study 2 (5)

वर्ष 1991 में 20 सामान्य से अधिक वजन की महिलाओं पर एक परीक्षण किया गया। उन्हें भी 21 दिन तक प्रतिदिन 20 मिलीग्राम योहिंबाइन दिया गया। उनके दैनिक भोजन को 1000 कैलोरीज पर सीमित कर दिया गया। इस परीक्षण में देखा गया कि जो महिलाएं योहिंबाइन ले रही हैं उन्होंने 3.55 किलोग्राम वजन कम किया और जो महिलाएं योहिंबाइन नहीं ले रही है उन्होंने 2.21 किलोग्राम वजन कम किया।

इन दोनों ही परीक्षणों में देखा जा सकता है कि योहिंबाइन वजन कम करने में सहायक है।

Study 3 (3)

वर्ष 1991 में 47 पुरुषों पर जिनकी औसत आयु 42 वर्ष थी, पर एक परीक्षण किया गया। उन्हें 6 महीने तक प्रतिदिन 43 मिलीग्राम योहिंबाइन दिया गया जो एक लंबी अवधि है। इस परीक्षण में देखा गया कि योहिंबाइन का शरीर के वजन, द्रव्यमान, कोलेस्ट्रॉल, शरीर की चर्बी, शरीर में चर्बी के विभाजन आदि पर कोई भी असर नहीं है।

Study 4 (4)

वर्ष 1986 में एक परीक्षण किया गया जिसमें 19 सामान्य से अधिक वजन वाले व्यक्ति सम्मिलित हुए। उन्हें 8 हफ्ते तक प्रतिदिन 18 मिलीग्राम योहिंबाइन दिया गया और साथ ही उनका दैनिक भोजन 1000 कैलोरीज पर सीमित कर दिया गया। इस परीक्षण में भी यह देखने को मिला की योहिंबाइन का शरीर के वजन और रक्तचाप पर कोई भी प्रभाव नहीं है।

इन चार परीक्षणों में देखा जा सकता है कि दो परीक्षण ऐसे है जो योहिंबाइन को वजन कम करने के लिए प्रभावशाली मानते हैं और अन्य दो परीक्षण योहिंबाइन को प्रभावशाली नहीं मानते। इस भ्रमित स्थिति को समझने के लिए हम कुछ और बातों पर गौर करते हैं।

यदि इन सभी परीक्षणों को अच्छे से देखा जाए तो हमें कुछ ऐसे कारक मिलते हैं जो योहिंबाइन के प्रभाव को नियंत्रित कर सकते हैं।

1. धूम्रपान (1, 16, 17)

पहला कारण है धूम्रपान। परीक्षणों के अनुसार जो व्यक्ति धूम्रपान करते हैं उन पर योहिंबाइन का प्रभाव बहुत कम है और जो व्यक्ति धूम्रपान नहीं करते उन पर यह प्रभावशाली है।

2. उपवास की अवस्था (6, 7, 14)

दूसरा कारण इंसुलिन से संबंधित है। योहिंबाइन को यदि उपवास की अवस्था में प्रयोग किया जाए तो यह प्रभावशाली होता है। इसका अर्थ है यदि योहिंबाइन को खाली पेट प्रयोग किया जाए और लेने के बाद 4 घंटे तक कुछ भी खाया ने जाए तो इंसुलिन में बढ़ोतरी नहीं होगी और योहिंबाइन वजन कम करने में सहायक होगा। जैसे कि एक व्यक्ति सुबह के समय में बिल्कुल खाली पेट होता है, उस समय वह योहिंबाइन का सेवन करता है और सेवन के बाद 4 घंटे तक कुछ भी नहीं खाता अर्थात उपवास की अवस्था में रहता है तो योहिंबाइन वजन कम करने में प्रभावशाली होता है।

3. शारीरिक व्यायाम (1, 6, 7)

तीसरा कारण शारीरिक व्यायाम से संबंधित है। परीक्षणों में देखा गया की योहिंबाइन के सेवन के उपरांत यदि व्यायाम किया जाए तो योहिंबाइन वजन कम करने में सहायक हो सकता है। इसे वैज्ञानिक भाषा में लिपिड मोबिलाइजेशन कहते हैं। परीक्षणों में देखा गया कि शारीरिक व्यायाम करने से पहले योहिंबाइन का सेवन करने से फ्री फैटी एसिड लेवल लगभग दोगुना हो गया। सामान्य भाषा में कह सकते हैं कि व्यायाम करने से योहिंबाइन को वजन कम करने में सहायता मिलती है।

4. सीमित कैलोरीज (1, 5)

चौथा कारण भोजन से संबंधित है। परीक्षणों में देखा गया कि योहिंबाइन के साथ यदि भोजन को सीमित कैलोरीज पर नियमित कर दिया जाए तो योहिंबाइन वजन कम करने में प्रभावशाली हो सकता है।

वजन कम करने के लिए योहिंबाइन का सेवन कितनी मात्रा में करना चाहिए?

सेवन की साधारण विधि 

योहिंबाइन का सेवन 0.2 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम शारीरिक भार के अनुसार किया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति का वजन 70 किलोग्राम है तो वह 70 किलोग्राम को 0.2 से गुणा करके 14 मिलीग्राम योहिंबाइन प्रतिदिन ले सकता है। इस प्रकार शरीर के वजन के हिसाब से आप देख सकते हैं कि कितना योहिंबाइन प्रतिदिन लिया जा सकता है। लेकिन इस बात का विशेष ध्यान रहे कि योहिंबाइन को 18 मिलीग्राम से अधिक नहीं लेना है। 18 मिलीग्राम से अधिक मात्रा के दुष्प्रभाव देखे गए हैं।

पूरे दिन में जितनी मात्रा का सेवन करना है उस मात्रा को तीन से चार बराबर हिस्सों में बांट लेना चाहिए। जैसे यदि कोई व्यक्ति 15 मिलीग्राम योहिंबाइन प्रतिदिन लेता है तो वह 5-5 मिलीग्राम दिन में तीन बार ले सकता है। यह खाली पेट ही लिया जाता है और कोशिश की जाती है कि इसे लेने के बाद ज्यादा से ज्यादा समय तक कुछ खाया या पिया ने जाए। पानी पिया जा सकता है, पानी से कोई समस्या नहीं है।

सेवन की विशेष विधि (6, 7, 14)

ऊपर बताया गया तरीका एक सामान्य तरीका है जो लगभग सभी प्रयोग करते हैं। लेकिन एक और विधि है जिससे हम कम मात्रा से भी अधिक लाभ ले सकते हैं।

विशेष विधि यह है कि इसको सुबह के समय में खाली पेट 5 से 8 मिलीग्राम की मात्रा में लिया जाए; और इसे लेने के बाद 40 मिनट की वेट ट्रेनिंग और 20 मिनट का कार्डियो किया जाना चाहिए। योहिंबाइन के सेवन के बाद 4 घंटे तक सिर्फ पानी पीना है और कुछ भी खाना या पीना नहीं है। 4 घंटे के बाद आप खाना खा सकते हैं। इसके साथ आपने अपने पूरे दिन की डाइट को लौ कैलोरीज पर रखना है अर्थात सीमित कैलोरीज पर निर्धारित करना है। जैसे अभी आप 2400 कैलोरीज की डाइट लेते हैं तो आप इसको 2000 कैलोरीज पर सीमित कर सकते हैं। आप की प्रतिदिन की डाइट में पूर्ण मात्रा में प्रोटीन, कम मात्रा में कार्बोहाइड्रेट्स, और सही मात्रा में गुड फैट होना चाहिए। धूम्रपान से दूरी बनाकर रखनी है। यदि आप इस विधि से योहिंबाइन का सेवन करते हैं तो सिर्फ एक बार लेने मात्र से इसका अच्छा लाभ मिल सकता है।

योहिंबाइन क्रीम का प्रभाव (2)

मार्केट में योहिंबाइन की क्रीम स्पीड आती है जो खास जगहों में चर्बी कम करने के लिए चमड़ी पर लगाई जाती है। जैसे जांघों की चर्बी कम करना या तोंद की चर्बी कम करना। 1995 में एक परीक्षण किया गया जिससे यह पता चला कि यह क्रीम्स बिल्कुल भी प्रभावशाली नहीं है।

टेस्टोस्टेरोन और शारीरिक शक्ति पर प्रभाव

बहुत से लोग टेस्टोस्टेरोन में वृद्धि करने के लिए और शारीरिक ताकत को बढ़ाने के लिए योहिंबाइन का प्रयोग करते हैं। लेकिन अभी तक जितने भी परीक्षण हुए हैं उन सभी के अनुसार योहिंबाइन का टेस्टोस्टेरोन और शारीरिक शक्ति पर कोई प्रभाव नहीं है।

योहिंबाइन का इरेक्टाइल डिस्फंक्शन या नपुंसकता पर क्या प्रभाव है?

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन एक योन रोग है जिसमें कोई पुरुष संभोग के समय अपने गुप्तांग में पर्याप्त उत्तेजना या स्तंभन प्राप्त नहीं कर पाता और इस वजह से संभोग करने में समस्या पैदा होती है। सामान्य भाषा में इसे नपुंसकता भी कहा जाता है।

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन पर परीक्षण (16, 17, 20, 25)

1998 में एक मेटा–एनालिसिस प्रकाशित हुआ था जिसमें सात अलग-अलग वैज्ञानिक परीक्षणों को सम्मिलित किया गया। उन सभी 7 वैज्ञानिक परीक्षणों और तीन अन्य परीक्षणों के अनुसार देखा गया कि योहिंबाइन इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या को ठीक करने के लिए प्रभावशाली है।

सभी परीक्षणों का ध्यान पूर्वक विश्लेषण करने से कुछ मुख्य बिंदु हमें समझ आते हैं जिसकी हम अब चर्चा करेंगे।

1. ऑर्गेनिक और नॉन ऑर्गेनिक इरेक्टाइल डिस्फंक्शन

पहला महत्वपूर्ण बिंदु है ऑर्गेनिक और नॉन ऑर्गेनिक इरेक्टाइल डिस्फंक्शन का। इरेक्टाइल डिस्फंक्शन दो प्रकार का हो सकता है, ऑर्गेनिक और नॉन ऑर्गेनिक। ऑर्गेनिक इरेक्टाइल डिस्फंक्शन कुछ शारीरिक समस्याओं की वजह से होता है जैसे मधुमेह या डायबिटीज की वजह से किसी को इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या हो जाती है। नॉन ऑर्गेनिक इरेक्टाइल डिस्फंक्शन मानसिक समस्याओं की वजह से होता है जैसे डिप्रेशन या अत्यधिक तनाव की वजह से किसी को इरेक्टाइल डिस्फंक्शन हो जाता है। ऑर्गेनिक इरेक्टाइल डिस्फंक्शन शरीर से संबंधित है और नॉन ऑर्गेनिक मस्तिष्क व्यवहार और भावनाओं से संबंधित है।

80% से अधिक मामलों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन ऑर्गेनिक होता है। लगभग 20% मामलों में यह नॉन ऑर्गेनिक होता है। योहिंबाइन के परीक्षणों में देखा गया की योहिंबाइन का ऑर्गेनिक इरेक्टाइल डिस्फंक्शन पर कुछ अधिक प्रभाव नहीं है। नॉन ऑर्गेनिक इरेक्टाइल डिस्फंक्शन पर इसका प्रभाव सामान्य है। इसका अर्थ है यदि किसी व्यक्ति को डायबिटीज की वजह से या किसी शारीरिक समस्या की वजह से इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या है तो योहिंबाइन उसके लिए कुछ अधिक लाभकारी नहीं होगा। लेकिन यदि किसी व्यक्ति को मानसिक समस्या की वजह से जैसे डिप्रेशन या अत्यधिक तनाव की वजह से इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या है तो योहिंबाइन लाभकारी हो सकता है।

2. इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की गंभीरता का स्तर (19)

दूसरा महत्वपूर्ण बिंदु इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की गंभीरता से संबंधित है। यदि किसी व्यक्ति को निम्न से मध्यम स्तर का इरेक्टाइल डिस्फंक्शन है तो योहिंबाइन प्रभावशाली हो सकता है। इसका अर्थ है योहिंबाइन थोड़ी बहुत समस्या के लिए लाभकारी हो सकता है। लेकिन यदि किसी व्यक्ति को माध्यम से उच्च स्तर का इरेक्टाइल डिस्फंक्शन है तो योहिंबाइन कुछ विशेष लाभकारी नहीं है। परीक्षणों में देखा गया कि निम्न से मध्यम स्तर के रोगियों में योहिंबाइन प्रभावशाली है लेकिन मध्यम से उच्च स्तर के रोगियों में योहिंबाइन प्रभावशाली नहीं है।

3. इरेक्टाइल डिस्फंक्शन और धूम्रपान (17)

तीसरा मुख्य बिंदु धूम्रपान से संबंधित है। वैसे तो धूम्रपान इरेक्टाइल डिस्फंक्शन का एक मुख्य कारण है। लेकिन परीक्षणों में भी देखा गया कि जो व्यक्ति धूम्रपान करते हैं उन पर योहिंबाइन का कोई विशेष प्रभाव नहीं है। कहने का अर्थ यह है कि परीक्षणों में धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों को कोई विशेष लाभ नहीं हुआ लेकिन धूम्रपान न करने वाले व्यक्तियों पर अच्छा लाभ देखने को मिला।

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के लिए योहिंबाइन का सेवन कितनी मात्रा में करना चाहिए?

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के लिए 5 मिलीग्राम योहिंबाइन को दिन में तीन बार प्रयोग किया जा सकता है। पूरे दिन में 15 मिलीग्राम की मात्रा का सेवन किया जाता है। एक विशेष बात मैं आपको फिर से बता देता हूं कि ऐसे व्यक्ति जिन्हें निम्न से मध्यम स्तर का नॉन ऑर्गेनिक इरेक्टाइल डिस्फंक्शन है और धूम्रपान नहीं करते हैं उन्हें योहिंबाइन से लाभ होने की अधिक संभावना है। बाकी सभी मामलों में लाभ होने की संभावना लगभग न के बराबर है।

मेरा सुझाव है कि जिन्हें इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या है उन्हें किसी अच्छे डॉक्टर से मिलना चाहिए और डॉक्टर के अनुसार ही किसी दवाई का सेवन करना चाहिए।(29) स्वयं अपने शरीर को प्रयोगशाला नहीं बनानी चाहिए। मार्केट में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या को ठीक करने के लिए जो सप्लीमेंट उपलब्ध हैं उनमें से अधिकतर सप्लीमेंट में मिलावट पाई जाती है जिससे एक बार तो लाभ होता है लेकिन बाद में हानि होने की संभावना रहती है। मैं आपको सिर्फ यह बता रहा हूं कि योहिंबाइन को कैसे प्रयोग किया जाता है। इसका अर्थ यह बिल्कुल भी नहीं है कि मैं आपसे योहिंबाइन लेने के लिए कह रहा हूं। यह एक ज्ञानवर्धक लेख है जो आपको जानकारी देने के लिए है।

योहिंबाइन के सेवन से क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं?

सामान्य दुष्प्रभाव (12, 15, 17, 31)

योहिंबाइन के प्रयोग से निम्न से उच्च स्तर के दुष्प्रभाव हो सकते हैं। सिर में दर्द होना, अत्यधिक तनाव या मानसिक परेशानी, उच्च रक्तचाप, टेकीकार्डिया अर्थात दिल की धड़कन का अनियमित होना, आदि समस्याएं हो सकती हैं। अधिक मात्रा के सेवन से हार्ट अटैक यानी दिल का दौरा भी आ सकता है और मृत्यु भी हो सकती है।

कुछ अन्य समस्याएं जैसे बार-बार पेशाब के लिए जाना, घबराहट होना, चेहरा लाल हो जाना, नींद न आना, पेट खराब होना, सीने में दर्द होना, त्वचा पर चकत्ते हो जाना या चर्म रोग हो जाना भी हो सकता है।

अधिकतर दुष्प्रभाव के मामले 15 मिलीग्राम से अधिक की मात्रा पर देखे गए हैं। 15 मिलीग्राम से कम की मात्रा पर बहुत मामूली दुष्प्रभाव जैसे सिर दर्द, घबराहट, पसीना, दिल की धड़कन तेज होना आदि समस्याएं देखी गई है।

कोर्टिसोल संबंधित दुष्प्रभाव (8, 9, 10, 17, 31)

एक और मुख्य दुष्प्रभाव है जिस पर चर्चा नहीं की जाती। वह दुष्प्रभाव है कोर्टिसोल के स्तर में वृद्धि होना। कॉर्टिसोल एक हार्मोन है जो शारीरिक और मानसिक तनाव से संबंधित है। कॉर्टिसोल में वृद्धि होने से शारीरिक और मानसिक तनाव बढ़ जाता है और यह बाकी के सभी हारमोंस को भी असंतुलित कर देता है। कहा जाता है कि 20 मिलीग्राम से अधिक मात्रा में सेवन करने से कोर्टिसोल में वृद्धि होती है लेकिन यह बात सच नहीं है। कुछ ऐसे मामले भी हैं जहां 20 मिलीग्राम से कम मात्रा के सेवन से भी कॉर्टिसोल में वृद्धि देखी गई है।

योहिंबाइन का प्रयोग किस को नहीं करना चाहिए?

सामान्यतः जो भी सप्लीमेंट उपलब्ध हैं वह केवल स्वस्थ लोगों के लिए होते हैं। जिन्हें कोई भी शारीरिक या मानसिक बीमारी है उन्हें अपने डॉक्टर से विचार-विमर्श करके ही कोई सप्लीमेंट प्रयोग करना चाहिए नहीं तो लाभ की जगह हानि भी हो सकती है।

रोग संबंधित (14, 27, 29, 30, 31, 32)

ऐसे व्यक्ति जिन्हें सीने में दर्द की समस्या है, किसी भी प्रकार का कोई मानसिक रोग है, रक्त से संबंधित कोई भी रोग है, मधुमेह यानि डायबिटीज है, किडनी या लीवर से संबंधित कोई रोग है, निम्न या उच्च रक्तचाप की समस्या है, पिछले 3 महीने में कोई सर्जरी हुई है या अगले 1 महीने में कोई सर्जरी होने वाली है, 18 वर्ष से कम आयु है, गर्भवती महिलाएं हैं, ऐसी माताएं जो बच्चों को स्तनपान करवाती हैं, ऐसे लोगों को योहिंबाइन का सेवन नहीं करना चाहिए।

दवा संबंधित

यदि आप निरंतर किसी दवा का सेवन करते हैं, मानसिक रोग जैसे डिप्रेशन है, मस्तिष्क, हृदय, लीवर, किडनी और रक्त से संबंधित कोई भी दवाई आप लेते हैं तो आपको योहिंबाइन का सेवन नहीं करना चाहिए। योहिंबाइन उस दवा के साथ मेल जोल करके गंभीर दुष्प्रभाव का कारण बन सकता है।

योहिंबाइन के विषय में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी

1. भ्रामक जानकारी (13, 26, 27)

वर्ष 2016 में अमेरिका में एक सर्वेक्षण किया गया। इस सर्वेक्षण में 49 योहिंबाइन के सप्लीमेंट को टेस्ट किया गया। सर्वेक्षण में यह सिद्ध हुआ की योहिंबाइन के सप्लीमेंट पर जो मात्रा दी गई है वह गलत दी गई है। सप्लीमेंट के अंदर उपलब्ध वास्तविक मात्रा अलग है और सप्लीमेंट के ऊपर लेबल पर अंकित मात्रा अलग है। दोनों मात्राओं में 23% से 147% का अंतर था। इसका अर्थ है यदि किसी बोतल के ऊपर लिखा है 5 मिलीग्राम योहिंबाइन प्रति खुराक तो उसकी वास्तविक मात्रा 1.15 मिलीग्राम से लेकर 7.35 मिलीग्राम तक हो सकती है।

इसका अर्थ है कि बताई गई मात्रा वास्तविक मात्रा से बहुत कम यह बहुत अधिक हो सकती है। इसलिए जब भी आप किसी योहिंबाइन सप्लीमेंट का प्रयोग करें तो पहले बहुत थोड़ी मात्रा से शुरू करें।

2. प्रतिबंधित सप्लीमेंट

योहिंबाइन सप्लीमेंट कई देशों में प्रतिबंधित है। कैनेडा, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड्स, और यूनाइटेड किंगडम में योहिंबाइन को बेचने पर प्रतिबंध है क्योंकि इसके बहुत अधिक दुष्प्रभाव देखने को मिल रहे हैं।(26) अमेरिका में भी यह एक प्रिसक्रिप्शन ड्रग है और बिना डॉक्टर की पर्ची के इस को खरीदा नहीं जा सकता। साथ ही अमेरिका में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन या नपुंसकता के लिए योहिंबाइन को बेचना गैरकानूनी है।(27) वर्ष 2000 से 2006 के बीच योहिंबाइन की अधिक मात्रा में सेवन करने से अकेले कैलिफोर्निया में 130 लोगों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। (26, 31)

3. कृत्रिम योहिंबाइन (26, 28, 29)

वैसे तो योहिंबाइन पेड़ की छाल से निकाला जाता है लेकिन आजकल इसको प्रयोगशाला में भी तैयार किया जाने लगा है। प्रयोगशाला में तैयार किया गया योहिंबाइन कृत्रिम या सिंथेटिक योहिंबाइन होता है। ऐसा योहिंबाइन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है और डाइटरी सप्लीमेंट में ऐसे कृत्रिम कंपाउंड को प्रयोग करना गैरकानूनी है।

निष्कर्ष

वजन कम करने के लिए योहिंबाइन का प्रयोग

योहिंबाइन वजन कम करने में सहायक है लेकिन कुछ खास परिस्थितियों में ही काम करता है। जैसे उपवास, शरीर के व्यायाम, निर्धारित भोजन, और धूम्रपान न करने पर। यदि आप यह सब बिना योहिंबाइन के भी करते हैं तो आपका वजन अवश्य कम होगा। बिना योहिंबाइन के मान लेते हैं 3.5 किलोग्राम कम होता है और योहिंबाइन के साथ 5 किलोग्राम कम होता है। ऐसे में आप देख सकते हैं की योहिंबाइन लेने से कुछ फायदा अवश्य होता है लेकिन इसके साथ ही इसके दुष्प्रभाव होने की संभावना और साथ ही कोर्टिसोल का स्तर बढ़ने की संभावना भी बढ़ जाती है। यदि आपके पास समय है तो आप बिना योहिंबाइन की भी वजन कम कर सकते हैं।

यदि आप अपने भोजन में पूरी मात्रा में प्रोटीन लेते हैं, कार्बोहाइड्रेट की मात्रा को कम कर देते हैं, अच्छी फैट का सेवन करते हैं, तो आपका वजन अपने आप सामान्य स्तर पर आ जाएगा। साथ में यदि कुछ सूखे मेवे, बीज, फिश ऑयल और सी एल ए भी लेते हैं और शारीरिक व्यायाम करते हैं तो बहुत आसानी से वजन कम हो जाएगा। इस प्रकार बिना किसी दुष्प्रभाव की संभावना के वजन कम किया जा सकता है।

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के लिए

यदि हम इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की बात करें तो यह सिर्फ ऐसे मामले में सहायता कर सकता है जो मानसिकता से संबंधित हो और निम्न से मध्यम स्तर का हो। विशेष बात यह भी है कि इसका प्रभाव बहुत ज्यादा नहीं है, मध्यम प्रभाव है। मार्केट में और भी कई प्रकार के सप्लीमेंट उपलब्ध हैं जैसे विटामिन डी, जिंक, कैल्शियम, मैग्नीशियम, अश्वगंधा, डी-एस्पार्टिक एसिड, आदि जो प्रभावशाली है और किसी प्रकार का दुष्प्रभाव नहीं है।

यदि एक स्वस्थ जीवनशैली जीने से, निरंतर व्यायाम करने से, ऊपर बताए गए सामान्य सप्लीमेंट प्रयोग करने से भी किसी प्रकार का लाभ नहीं हो रहा तो आपको बिना देर किए किसी अच्छे डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

योहिंबाइन पर बहुत ही कम परीक्षण किए गए हैं और जो भी परीक्षण हुए हैं हमने उन पर चर्चा कर ली है।

धन्यवाद।

References

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Author: Vikas Dhavaria

A free spirit who loves to read books. Interested in philosophy, logic and mathematics.

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