D-Aspartic Acid Supplement for Testosterone, Sperm Quality and Bodybuilding in Hindi

इस लेख का विषय है डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid)। यह एक सप्लीमेंट है जो टेस्टोस्टेरोन में वृद्धि करने के लिए, फर्टिलिटी अर्थात शुक्राणुओं की गुणवत्ता में वृद्धि करने के लिए, मांसपेशियों की सुडौलता और शारीरिक शक्ति में वृद्धि करने के लिए प्रयोग किया जाता है। इस लेख में हम देखेंगे कि क्या यह सप्लीमेंट असरदार है या नहीं। साथ ही हम देखेंगे कि यह सप्लीमेंट किसे प्रयोग करना चाहिए, कब कैसे और कितनी मात्रा में प्रयोग करना चाहिए और इसके दुष्प्रभाव क्या हो सकते हैं।

डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) एसिड क्या होता है?

डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) एक अमीनो एसिड है जो हमारे शरीर में हारमोंस को बनाने में सहायता करता है। आगे चलने से पहले मैं आपको स्पष्ट कर देता हूं कि मैं डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) के विषय में बात कर रहा हूं, Aspartic Acid, L-Aspartic Acid या L-Aspartate के विषय में बात नहीं कर रहा हूं।

लगभग सभी अमीनो एसिड दो प्रकार के होते हैं। L और D। Aspartic Acid की भी दो प्रकार हैं, L-Aspartic Acid और D-Aspartic Acid। यह जो दोनों प्रकार होते हैं, इनका केमिकल फार्मूला एक जैसा होता है, लेकिन इनका मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर एक दूसरे से अलग होता है। यह एक दूसरे की मिरर इमेज होते हैं।

L-Aspartic Acid हमारे शरीर में प्रोटीन तैयार करने में सहायता करता है। लेकिन डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) प्रोटीन तैयार नहीं करता, वह हमारी बॉडी में हारमोंस पैदा करने में सहायता करता है।

डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) हमारे मस्तिष्क में एक विशेष प्रकार का और हॉर्मोन पैदा करता है जिससे हमारे शरीर में टेस्टोस्टेरोन पैदा होता है और इसी कारण से यह माना जाता है कि डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) टेस्टोस्टेरोन में वृद्धि कर सकता है। इसी कारण से मार्केट में डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) के बहुत सारे सप्लीमेंट्स मिलते हैं।

डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) का टेस्टोस्टेरोन पर प्रभाव?

अभी तक पांच ऐसी स्टडीज हैं जो D-Aspartic एसिड और टेस्टोस्टेरोन को लेकर मनुष्यों पर की गई है। मैं सिर्फ मनुष्यों पर की गई स्टडीज को ले रहा हूं, जो स्टडीज जानवरों पर की गई है वह स्टडीज में नहीं ले रहा।

पहली स्टडी 2009 में हुई है जिसमें 43 स्वस्थ सुस्त पुरुषों को लिया गया था। उन सभी पुरुषों की आयु 27 से 37 वर्ष के बीच में थी। स्टडी से पहले उनका औसत टेस्टोस्टेरोन स्तर 4.5 ng/ml था। सभी पुरुषों को 3120mg डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) दिया गया। यह स्टडी केवल 12 दिन की थी। 12 दिन के बाद देखा गया कि टेस्टोस्टेरोन में 42% की वृद्धि हुई है। 3 दिन तक सप्लीमेंट ना लेने के पश्चात सभी पुरुषों का टेस्टोस्टेरोन नीचे आ गया लेकिन फिर भी यह पहले से 22% अधिक था।

मनुष्य पर दूसरी स्टडी 2013 में की गई थी। इस स्टडी में 20 स्वस्थ सक्रिय पुरुषों को लिया गया था। सभी पुरुषों की आयु 22.8 वर्ष के आसपास थी और स्टडी से पहले उनका औसत टेस्टोस्टेरोन स्तर 8.08 ng/ml था। स्टडी में 3 ग्राम डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) 28 दिनों तक रोज दिया गया। 28 दिन तक सप्लीमेंट लेने के बाद सभी पुरुषों का टेस्टोस्टेरोन चेक किया गया तो पता चला कि टेस्टोस्टेरोन के स्तर में कोई भी परिवर्तन नहीं हुआ है। इसका अर्थ है कि सप्लीमेंट का कोई असर नहीं हुआ है।

उसके बाद जो स्टडी है वह 2015 में की गई थी। इस स्टडी में 10 पुरुषों को लिया गया था जिनकी आयु 42 वर्ष के आसपास थी। स्टडी से पहले उनका औसत टेस्टोस्टेरोन स्तर 3 ng/ml था। इस स्टडी में 3120 mg डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) का प्रयोग किया गया। यह स्टडी 28 दिन तक चली। 28 दिन के बाद यह परिणाम मिला कि इस सप्लीमेंट का टेस्टोस्टेरोन पर कोई भी प्रभाव नहीं है।

2015 की एक और स्टडी है जो मनुष्यों पर की गई है। इस स्टडी में 24 पुरुषों को लिया गया था जिनकी आयु 24.5 वर्ष के आसपास थी। स्टडी से पहले उनका औसत टेस्टोस्टेरोन स्तर 6.27 ng/ml था। इस स्टडी में 3 ग्राम और 6 ग्राम की मात्रा में डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) 14 दिनों तक दिया गया। 14 दिन के बाद यह परिणाम मिला कि 3 ग्राम की मात्रा से टेस्टोस्टरॉन पर कोई प्रभाव नहीं है।

2017 में फिर से रिसर्च की गई। इस रिसर्च में 22 पुरुषों को लिया गया जिनकी आयु 23.8 वर्ष के आसपास थी। स्टडी से पहले उनका औसत टेस्टोस्टेरोन स्तर 6 ng/ml था। इस स्टडी में 6 ग्राम की मात्रा 12 हफ्तों तक दी गई। 12 हफ्ते के बाद परिणाम मिला कि सप्लीमेंट का टेस्टोस्टेरोन पर कोई भी प्रभाव नहीं है।

अभी तक मनुष्य पर जो भी स्टडीज की गई हैं वह सभी आपके सामने हैं। इन पांच स्टडीज में से सिर्फ एक स्टडी के हिसाब से डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) टेस्टोस्टेरोन पर प्रभावशाली है अन्य चार स्टडीज के अनुसार यह प्रभावशाली नहीं है।

यदि हम इन सभी स्टडीज को ध्यान से देखते हैं और विश्लेषण करते हैं तो 3 मुख्य बातें सामने आती हैं।

पहली बात यह सामने आती है कि डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) टेस्टोस्टेरोन पर प्रभावशाली नहीं है। यह सप्लीमेंट टेस्टोस्टेरोन में वृद्धि नहीं कर सकता। आप देख सकते हैं कि सिर्फ एक ही स्टडी में यह प्रभावी सिद्ध हुआ है अन्य किसी भी स्टडी में नहीं।

दूसरी मुख्य बात यह है कि यदि यह सप्लीमेंट टेस्टोस्टेरोन में वृद्धि कर सकता है तो केवल कुछ खास शर्तों के आधार पर ही कर सकता है। वह खास शर्तें कौन सी हैं। हम पहली स्टडी जो प्रभावशाली है, उसको अन्य चार स्टडी जो प्रभावशाली नहीं हैं, उनके साथ तुलना करके निष्कर्ष निकाल सकते हैं।

  • पहली स्टडी जिन पुरुषों पर की गई है वह सभी किसी भी प्रकार का व्यायाम नहीं करते और अन्य चार स्टडी जिन पुरुषों पर की गई है वह या तो व्यायाम करते हैं या फिर कुशल खिलाड़ी हैं। तो पहली शर्त यह है कि व्यक्ति ऐसा होना चाहिए जो व्यायाम ना करता हूं।
  • दूसरी शर्त यह है कि उसकी आयु 30 वर्ष से अधिक होनी चाहिए जैसा कि हम पहली स्टडी में देख सकते हैं।
  • तीसरी शर्त है कि उसका टेस्टोस्टेरोन स्तर सामान्य से कम होना चाहिए।

इसका अर्थ है एक ऐसा व्यक्ति जो व्यायाम ना करता हो जिसकी आयु 30 वर्ष से अधिक हो और जिसका टेस्टोस्टेरोन स्तर सामान्य से कम हो ऐसे व्यक्ति को डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) सप्लीमेंट लेने से शायद फायदा हो सकता है। मैं फिर से कहता हूं कि शायद फायदा हो सकता है क्योंकि स्टडी आपके सामने हैं आप भी देख सकते हैं कि क्या चल रहा है।

तीसरी मुख्य बात यह है कि यदिडी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) की सहायता से टेस्टोस्टेरोन का स्तर में वृद्धि होगी जाती है तो वह ज्यादा समय तक स्थिर नहीं रहेगा। वह फिर से कम हो जाएगा। पहली स्टडी में आप देख सकते हैं कि पहले टेस्टोस्टेरोन का स्तर 42% तक बढ़ गया और फिर बाद में नीचे आ गया। मेरा अनुमान है कि 15 से 20 दिन में टेस्टोस्टेरोन में जितनी वृद्धि होती है वह फिर से पहले वाले स्तर पर आ जाती है।

डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) का शुक्राणुओं की गुणवत्ता पर प्रभाव

यदि एक पुरुष एक महिला को गर्भवती करना चाहता है तो पुरुष की शुक्राणुओं की गुणवत्ता अच्छी होनी चाहिए। सामान्य भाषा में यदि बात करें तो यदि एक पति पत्नी बच्चा पैदा करना चाहते हैं तो पति के शुक्राणुओं की गुणवत्ता अच्छी होनी चाहिए। यदि शुक्राणुओं की गुणवत्ता अच्छी नहीं है तो बच्चा पैदा करने में समस्या आ सकती है।

2012 में 60 Sub-fertile रोगियों पर एक स्टडी की गई थी। इस स्टडी में 30 रोगी ऐसे थे जिन्हें Oligoasthenozoospermia था और 30 रोगी ऐसे थे जिन्हें Asthenozoospermia था।

जिन्हे समझने में समस्या आ रही है उन्हें में विस्तृत रूप से बता देता हूं।

Fertile का मतलब है ऐसा व्यक्ति जो आसानी से बचा पैदा कर सकता है। जिसे कोई समस्या नहीं है और पूरी तरह से स्वस्थ है।

Infertile का मतलब है एक ऐसा व्यक्ति जो बच्चा पैदा करने में असमर्थ है। वह कितनी भी कोशिश करें वह बच्चा पैदा नहीं कर सकता।

Subfertile का मतलब है एक ऐसा व्यक्ति जो पूरी तरह से Fertile भी नहीं है और पूरी तरह से Infertile भी नहीं है। वह बच्चा पैदा कर सकता है लेकिन उसके लिए इतना आसान नहीं होता। उसे बहुत ज्यादा बार कोशिश करनी पड़ सकती है। उसे काफी ज्यादा समय भी लग सकता है।

इस स्टडी में जो रोगी लिए गए हैं वह सभी Subfertile हैं।

Oligoasthenozoospermia में दो तरह की समस्याएं होती हैं। पहली समस्या है Reduced Sperm Motility। इसका अर्थ है शुक्राणुओं की सक्रियता कम होती है। यदि एक शुक्राणु आगे की दिशा में सीधा और तेजी से गति कर सकता है तो वह सक्रिय शुक्राणु है। यदि सक्रिय शुक्राणुओं की संख्या कम हो तो बच्चा पैदा करने में समस्या आती है। दूसरी समस्या होती है Low Sperm Count। इसका अर्थ है वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या का कम होना। वीर्य में यदि शुक्राणुओं की संख्या 15 मिलियन से कम है तो बच्चा पैदा करने में समस्या आती है।

Asthenozoospermia का अर्थ है केवल शुक्राणुओं की सक्रियता कम होना। शुक्राणुओं की सक्रियता से वही अर्थ है की सामने की दिशा में और तेजी से गति करने वाले सक्रिय शुक्राणु कम है।

अभी आप समझ गए होंगे कि इसका क्या अर्थ है। यह 60 रोगी ऐसे हैं जिन्हें बच्चा पैदा करने में समस्या आ रही थी क्योंकि इनकी शुक्राणुओं की गुणवत्ता अच्छी नहीं थी। यह जो 30 रोगी हैं इनकी शुक्राणुओं की सक्रियता कम थी और साथ ही शुक्राणुओं की संख्या भी कम थी। दूसरे 30 रोगियों में केवल शुक्राणुओं की सक्रियता कम थी।

इन सभी रोगियों को 90 दिनों तक सोडियम डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) दिया गया जिसमें 2.66 ग्राम डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) था।

90 दिन के बाद जो परिणाम मिला वह आप इस टेबल में देख सकते हैं। यदि शुक्राणुओं की संख्या की बात करें तो पहले समूह में शुक्राणुओं की संख्या 8.2 मिलियन से 16.5 मिलियन तक पहुंच गई। दूसरे समूह में 29.9 मिलियन से 48.7 मिलीयन पहुंच गई। शुक्राणुओं की सक्रियता की बात करें तो पहले ग्रुप में 15.5% से 23.1% हो गई और दूसरे समूह में 11.6% से 21.6% हो गई।

स्टडी में यह भी देखा गया कि रोगियों का प्रेगनेंसी रेट भी काफी ज्यादा बढ़ गया। इस स्टडी के अनुसार हम कह सकते हैं कि डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) से शुक्राणुओं की गुणवत्ता अच्छी हो जाती है जिससे बच्चा पैदा करना आसान हो जाता है।

डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) का मांसपेशियों की सुडौलता और शरीर की शक्ति पर प्रभाव

यह माना जाता है कि इस सप्लीमेंट से टेस्टोस्टेरोन में वृद्धि होती है और टेस्टोस्टेरोन में वृद्धि होने से मांसपेशियों में सुडौलता और शरीर में शक्ति बढ़ जाती है। यह तो आपने देख ही लिया है कि इस सप्लीमेंट का टेस्टोस्टेरोन पर क्या प्रभाव है।

5 स्टडीज हमने अभी तक देखी हैं उनमें से इन 3 स्टडीज में मांसपेशियों की सुडौलता और शरीर की शक्ति को भी टेस्ट किया गया था। तीनों ही स्टडीज में एक ही उत्तर मिला कि डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) से मांसपेशियों की सुडौलता और शारीरिक शक्ति में कोई प्रभाव नहीं है।

इस आधार पर हम कह सकते हैं कि डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) मांसपेशियों की सुडौलता और शारीरिक शक्ति में वृद्धि करने के लिए प्रभावशाली नहीं है।

डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) की मात्रा और प्रयोग

टेस्टोस्टेरोन: ऐसे व्यक्ति जो व्यायाम नहीं करते जिनकी आयु 30 वर्ष से अधिक है और जिनका टेस्टोस्टेरोन स्तर सामान्य से नीचे है ऐसे व्यक्ति को डीएस पार्टी एसिड सप्लीमेंट लेने से फायदा हो सकता है। ऐसे व्यक्ति को 3 ग्राम डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) किसी अच्छे मल्टीविटामिन के साथ सुबह के नाश्ते के बाद लेना चाहिए।

फर्टिलिटी: ऐसे व्यक्ति जो Subfertile हैं। शुक्राणुओं की सक्रियता या शुक्राणुओं की कमी के कारण बच्चा पैदा नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे व्यक्ति 2.66 ग्राम डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) पानी या जूस के साथ दोपहर या शाम के भोजन के बाद ले सकते हैं।

बॉडीबिल्डिंग: मांसपेशियों की सुडोलता और शरीर की शक्ति में वृद्धि करने के लिए यह सप्लीमेंट प्रभावशाली नहीं है। इसलिए ऐसे व्यक्तियों को इस सप्लीमेंट का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) के दुष्प्रभाव

एक स्टडी के अनुसार 3 ग्राम डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) 90 दिन तक लिया गया और कोई भी दुष्प्रभाव सामने नहीं आया। एक अन्य स्टडी के अनुसार 6 ग्राम डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) 12 हफ्ते तक रोज लिया गया और कोई भी दुष्प्रभाव सामने नहीं आया। हम कह सकते हैं कि 3 से 6 ग्राम की मात्रा में यदि डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) 3 महीने तक प्रयोग किया जाए तो सुरक्षित है।

निष्कर्ष

डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) का टेस्टोस्टेरोन पर प्रभाव नहीं है। फिर भी ऐसे व्यक्ति जो Exercise नहीं करते, 30 वर्ष से अधिक आयु के हैं और जिनका टेस्टोस्टेरोन स्तर सामान्य से कम है ऐसे व्यक्तियों को लाभ मिल सकता है। लेकिन इस विषय पर केवल एक ही स्टडी दी गई है।

डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) से शुक्राणुओं की गुणवत्ता में वृद्धि हो सकती है और ऐसे व्यक्ति जो शुक्राणुओं की गुणवत्ता कम होने की वजह से बच्चा पैदा नहीं कर पा रहे उन्हें यह सप्लीमेंट सहायता कर सकता है। लेकिन इस पर अभी तक सिर्फ एक ही स्टडी दी गई है इसलिए मैं 100% विश्वसनीयता के साथ नहीं कह सकता।

यह सप्लीमेंट मांसपेशियों की सुडौलता और शारीरिक शक्ति में वृद्धि करने के लिए प्रभावशाली नहीं है।

इस सप्लीमेंट पर अधिक स्टडी करने की आवश्यकता है। अभी तक जो भी स्टडी की गई है वह इतनी अच्छी नहीं है। अभी तक जो भी स्टडी की गई है उनमें कम व्यक्ति लिए गए हैं और उन व्यक्तियों के विषय में अधिक जानकारी नहीं दी गई है। मैं चाहता हूं कि डी-एस्पार्टिक एसिड (D-Aspartic Acid) का टेस्टोस्टेरोन और शुक्राणुओं की गुणवत्ता पर क्या प्रभाव है इसके लिए विस्तृत रूप से स्टडी की जानी चाहिए।

References:

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Author: Vikas Dhavaria

A free spirit who loves to read books. Interested in philosophy and nutrition.

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